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Thursday, February 26, 2026

यंग एज में किडनी डैमेज बन रहा गंभीर खतरा एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

 यंग एज में किडनी डैमेज बन रहा गंभीर खतरा एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

सोनीपत: आज के समय में युवा वयस्कों में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण मोटापा, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, जेनेटिक कारण और हाई ब्लड प्रेशर हैं। ये सभी फैक्टर मिलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के खतरे को बढ़ाते हैं। कई बार शरीर की इम्यून सिस्टम ही किडनी पर हमला करने लगती है, जैसे ल्यूपस और IgA नेफ्रोपैथी में होता है।


इसके अलावा, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज जैसी जेनेटिक कंडीशन, अस्वस्थ लाइफस्टाइल, धूम्रपान, खराब डाइट और मोटापा कम उम्र में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनते हैं, जो किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) का अधिक उपयोग, जन्म से मौजूद किडनी की संरचनात्मक समस्याएं और बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन भी किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ मनोज अरोड़ा ने बताया कि “किडनी बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं और कई बार लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार थकान और कमजोरी, पैरों, टखनों या आंखों के आसपास सूजन, पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव, झागदार पेशाब और हाई ब्लड प्रेशर इसके सामान्य संकेत हैं। कुछ लोगों में बिना किसी स्पष्ट कारण के मतली, भूख कम लगना या सामान्य अस्वस्थता भी महसूस हो सकती है। ये सभी लक्षण शरीर में टॉक्सिन के जमा होने या एनीमिया के कारण हो सकते हैं और समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी होता है।“


डॉ मनोज ने आगे बताया कि “इस बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक, मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना, नियमित एक्सरसाइज करना और शरीर का वजन नियंत्रित रखना किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही, बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग करने से बचना चाहिए। जिन लोगों के परिवार में किडनी बीमारी का इतिहास है, उन्हें नियमित रूप से ब्लड और यूरिन टेस्ट कराते रहना चाहिए। साधारण यूरिन जांच, किडनी फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के माध्यम से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे किडनी फेलियर की प्रगति को रोका या धीमा किया जा सकता है।“


पिछले 30 वर्षों में कम उम्र में होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामलों में 74 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, और युवा पुरुषों में इससे मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में अधिक देखी गई है। यह बीमारी केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी लंबे समय तक प्रभाव डालती है। इसलिए युवाओं के लिए जरूरी है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, नियमित जांच कराएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी को सुरक्षित रखें।